लव जिहाद: फुरकान अली ने ‘सुल्तान सिंह’ बन कर दलित लड़की को फसाया, डेढ़ साल बाद घर से निकाला

शौचालय बनाने आए राजमिस्त्री फुरकान अली ने सुल्तान सिंह बन कर दलित लड़की को फँसाया और फिर किया निकाह। फिर प्रताड़ित कर घर से निकाला।

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले से लव जिहाद का एक मामला सामने आया है।

यहाँ फुरकान अली नाम का एक राजमिस्त्री खुद को हिन्दू बताकर एक दलित लड़की को अपनी जाल में फँसाकर भगा ले गया। फुरकान के चंगुल में फँसी लड़की ने खुद को धोखे में रखकर निकाह करने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने गुरुवार (2 नवम्बर 2023) को पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला मैनपुरी के कुरावली थाना क्षेत्र का है। यहाँ के एक गाँव में 2 साल पहले सरकारी निर्देश पर शौचालय का निर्माण हो रहा था। इसी में संभल का रहने वाला फुरकान अली राजमिस्त्री के तौर पर काम कर रहा था। इस दौरान वह एक दलित परिवार में शौचालय बना रहा था।

See also  भीमा कोरेगांव का इतिहास क्या है? क्या है 200 साल पुरानी लड़ाई

उसी दौरान फुरकान दलित लड़की के संपर्क में आया। फुरकान ने उसे अपना नाम सुल्तान सिंह और खुद को पीड़िता की ही बिरादरी का बताया था। कुछ समय बाद पीड़िता और फुरकान में फोन पर बातें होने लगीं। बताया जा रहा है कि थोड़े समय की बातचीत के बाद फुरकान ने सुल्तान बनकर पीड़िता को अपने जाल में पूरी तरह से फँसा लिया।

लगभग डेढ़ साल पहले फुरकान पीड़िता को अपने साथ संभल भगा ले गया। महिला के घर से जाने के बाद परिजनों ने काफी दिन तक उसकी तलाश की। हालाँकि, उसके नहीं मिलने पर वे थक हारकर बैठ गए। इधर मुरादाबाद में फुरकान ने पीड़िता से निकाह किया। जब महिला फुरकान के घर गई, तब उसे अपना निकाह किसी मुस्लिम से होने की जानकारी हुई।

See also  Tantya Bhil: The Tribal Robinhood of British India

आरोप है कि फ़ुरक़ान पीड़िता पर लगातार अत्याचार करता रहा। फुरकान ने महिला को मारपीट कर घर से निकाल लिया। संभल से पीड़िता सीधे अपने घर आई। घर से वह परिजनों के साथ थाने पहुँची और फुरकान के खिलाफ FIR दर्ज करवाया। पुलिस ने 2 नवंबर 2023 को फुरकान को गिरफ्तार कर लिया। जरूरी कार्रवाई के बाद आरोपित को जेल भेज दिया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

10 most Expensive cities in the World धरती आबा बिरसा मुंडा के कथन