चौथा जयपाल-जुलियुस-हन्ना साहित्य पुरस्कार समारोह और बहुभाषाई आदिवासी-देशज काव्यपाठ 9 नवंबर को

रांची एक बार फिर आदिवासी साहित्य के रंगों से सराबोर होने जा रहा है। प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन के तत्वावधान में चौथा जयपाल-जुलियुस-हन्ना साहित्य पुरस्कार समारोह और बहुभाषाई आदिवासी-देशज काव्यपाठ का आयोजन 9 नवंबर को पद्मश्री रामदयाल मुंडा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (टीआरआई) हॉल, मोरहाबादी में किया जाएगा।

इस राष्ट्रीय स्तर के एक दिवसीय साहित्यिक आयोजन का उद्घाटन दिल्ली विश्वविद्यालय की वरिष्ठ हिंदी प्राध्यापक और किन्नौरी आदिवासी साहित्यकार डॉ. स्नेहलता नेगी करेंगी।

पुरस्कार सत्र में तीन आदिवासी रचनाकारों का सम्मान

कार्यक्रम के पहले सत्र में आदिवासी साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले तीन रचनाकारों को जयपाल-जुलियुस-हन्ना साहित्य पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा।
इस वर्ष के पुरस्कार विजेता हैं —

सोनी रूमछु (अरुणाचल प्रदेश, नोक्ते समुदाय) — “वह केवल पेड़ नहीं था” (कविता संग्रह)

काशाराय कुदादा (झारखंड, हो समुदाय) — “दुपुब दिषुम” (वारंगक्षिति लिपि में निबंध संग्रह)

मनोज मुर्मू (झारखंड, संताली समुदाय) — “मानवा जियो़न” (कविता संग्रह)

बहुभाषाई काव्यपाठ से झलकेगी झारखंड की विविधता

See also  टंट्या भील: गुलाम भारत के आदिवासी रॉबिनहुड

दूसरे सत्र में झारखंड की विभिन्न जनजातीय और देशज भाषाओं — बिरजिया, असुर, मुंडारी, संताली, हो, खड़िया, कुड़ुख, नागपुरी-सादरी, पंचपरगनिया, कुड़मालि और खोरठा — के कवि अपनी कविताओं का पाठ करेंगे। इस सत्र का उद्देश्य राज्य की समृद्ध भाषाई विरासत और सांस्कृतिक विविधता को मंच पर प्रस्तुत करना है।

साहित्यिक परंपरा को सशक्त करने का प्रयास

गौरतलब है कि प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन ने यह पुरस्कार वर्ष 2022 में आरंभ किया था। यह पुरस्कार तीन प्रमुख आदिवासी व्यक्तित्वों — जयपाल सिंह मुंडा, जुलियुस तिग्गा और हन्ना बोदरा — की स्मृति में स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य आदिवासी और देशज साहित्य को प्रोत्साहन देना तथा रचनाकारों को राष्ट्रीय साहित्यिक विमर्श से जोड़ना है।

संस्थागत सहयोग

इस आयोजन को झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा और टाटा स्टील फाउंडेशन का सहयोग प्राप्त है।
अखड़ा की महासचिव वंदना टेटे ने बताया कि यह मंच लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है जिससे आदिवासी लेखन को मुख्यधारा के राष्ट्रीय विमर्श में उचित स्थान मिल सके।

See also  शंकर शाह मरावी और रघुनाथ शाह मरावी : गोंडवाना के बलिदानी वीर

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए प्रवक्ता कृष्णमोहनसिंह मुंडा ने कहा कि “यह आयोजन न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के आदिवासी और देशज लेखकों को एक साझा मंच प्रदान करेगा।”

📅 स्थान: पद्मश्री रामदयाल मुंडा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (टीआरआई), रांची
🕒 तिथि: 9 नवंबर 2025
📍 आयोजक: प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन
🤝 सहयोगी संस्थाएं: झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा एवं टाटा स्टील फाउंडेशन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

10 most Expensive cities in the World धरती आबा बिरसा मुंडा के कथन