मणिपुर में मुक्त आवाजाही पर रोक: आदिवासी संगठन का विरोध

मणिपुर में एक प्रमुख जनजातीय संगठन ने केंद्र सरकार के उस प्रयास का विरोध करने का निर्णय लिया है, जिसमें इंफाल घाटी को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली सभी सड़कों पर मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। इंफाल घाटी से गुजरने वाले दो मुख्य राजमार्ग और अन्य सभी प्रमुख सड़कें कुकी-ज़ो समुदाय के प्रभाव वाले पहाड़ी क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं। यह समुदाय मई 2023 से गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय के साथ जारी जातीय संघर्ष में शामिल रहा है।

1 मार्च को गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद पहली उच्च स्तरीय बैठक में निर्देश दिया था कि 8 मार्च से राज्य की सभी सड़कों पर निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

हालांकि, जनजातीय एकता समिति (COTU) ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक कुकी-ज़ो समुदाय के लिए अलग प्रशासन की मांग पूरी नहीं होती, तब तक उनके क्षेत्रों में मुक्त आवाजाही की अनुमति नहीं दी जाएगी। संगठन का कहना है कि जब तक समुदाय की आकांक्षाओं का सम्मान नहीं किया जाता, तब तक वे सरकार के इस निर्णय को लागू नहीं होने देंगे।

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अलग प्रशासन की मांग पर अड़े आदिवासी संगठन

3 मार्च को कांगपोकपी जिले के फैजांग गांव में एक सभा के दौरान COTU के महासचिव लामिलुन सिंगसिट ने कहा कि कुकी-ज़ो समुदाय किसी भी हाल में अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने जोर देकर कहा,
“अलग प्रशासन की लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक हमारा लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता। हम हर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध और प्रतिरोध करेंगे।”

संगठन ने मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से उनकी “अलग प्रशासन” के विरोध वाली टिप्पणी वापस लेने की भी मांग की। COTU ने राज्यपाल द्वारा मैतेई कट्टरपंथी समूह अरंबाई टेंगोल के सदस्यों के साथ की गई बैठक को खारिज करते हुए कहा कि इससे कुकी-ज़ो समुदाय के भविष्य का निर्धारण नहीं किया जा सकता।

संगठन ने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार कुकी-ज़ो स्वयंसेवकों को गिरफ्तार करने का प्रयास करती है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके प्रभाव वाले जिलों में किसी भी अप्रिय घटना के लिए वहां के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) जिम्मेदार होंगे।

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समुदाय को ‘देशद्रोह’ की चेतावनी

COTU ने अपने समुदाय के सदस्यों को भी आगाह किया कि वे संगठन के उद्देश्यों के साथ विश्वासघात न करें। संगठन ने कहा कि जो कोई भी व्यक्तिगत लाभ के लिए सरकार के साथ समझौता करेगा, उसे ‘देशद्रोही’ माना जाएगा। इसके अलावा, संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार बिना कुकी-ज़ो समुदाय के राजनीतिक मुद्दों का समाधान किए शांति स्थापित करने का प्रयास करती है, तो सत्तारूढ़ सरकार का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।

सरकार का सख्त रुख

राज्य की राजधानी इंफाल में एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार राजमार्गों पर माल और लोगों की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। अधिकारी ने स्पष्ट किया,
“मणिपुर में स्थायी शांति सुनिश्चित करने के हमारे प्रयासों में बाधा डालने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

मणिपुर में जातीय विभाजन और हिंसा की पृष्ठभूमि

मई 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से ही राज्य गहरे सामाजिक विभाजन का शिकार हो गया है। कुकी समुदाय मुख्य रूप से पहाड़ियों में केंद्रित है, जबकि मैतेई समुदाय इंफाल घाटी में बसता है। घाटी में हवाई अड्डा, प्रमुख अस्पताल, स्कूल और कॉलेज स्थित हैं, लेकिन यह कुकी समुदाय के लिए पूरी तरह से दुर्गम बनी हुई है। दूसरी ओर, मैतेई समुदाय के लोग भी पहाड़ी इलाकों में यात्रा नहीं कर पा रहे हैं।

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अब तक इस जातीय संघर्ष में 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 50,000 से अधिक लोगों को विस्थापित होना पड़ा है।

राष्ट्रपति शासन के तहत मणिपुर

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 9 फरवरी से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है। केंद्र सरकार अब राज्य में शांति स्थापित करने के प्रयास कर रही है, लेकिन कुकी-ज़ो समुदाय के अलग प्रशासन की मांग और सरकार की नीतियों के विरोध से मणिपुर का संकट और गहराता जा रहा है।

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